माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइज़ (MSE) के लिए पब्लिक प्रोक्योरमेंट पॉलिसी ऑर्डर, 2012 के तहत केंद्रीय मंत्रालय, विभाग और CPSU अपनी खरीद का एक हिस्सा MSE से लेते हैं, और टेंडर में MSE को खास फायदे मिलते हैं।
खरीद लक्ष्य
- सालाना खरीद का कम से कम 25% MSE से।
- इसमें 4% SC/ST उद्यमियों के MSE से और 3% महिला-स्वामित्व वाले MSE से।
- 358 आइटम केवल MSE से खरीद के लिए आरक्षित हैं।
टेंडर में फायदे
- टेंडर दस्तावेज़ मुफ्त।
- अर्नेस्ट मनी डिपॉज़िट (EMD) से छूट।
- टेंडर में अनुमति हो तो पिछले टर्नओवर और अनुभव की शर्तों में छूट।
- L1 + 15% प्राइस मैचिंग: अगर सबसे कम बोली वाला MSE नहीं है, तो L1 से 15% के अंदर बोली लगाने वाला MSE, L1 कीमत पर मैच करके कम से कम 25% ऑर्डर वैल्यू पा सकता है। आइटम बांटा न जा सके तो पूरा ऑर्डर भी मिल सकता है।
कौन शामिल है, कौन नहीं
- वैध Udyam रजिस्ट्रेशन वाले माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइज़।
- ट्रेडर, डिस्ट्रीब्यूटर, सोल एजेंट और वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट इस नीति के फायदों से बाहर हैं।
- मीडियम एंटरप्राइज़ इन MSE फायदों में शामिल नहीं।
- यह नीति MSE को सिक्योरिटी डिपॉज़िट या परफॉर्मेंस बैंक गारंटी से छूट नहीं देती।
कई टेंडर इन फायदों के लिए अब भी NSIC रजिस्ट्रेशन या खास सर्टिफिकेट मांगते हैं। हमेशा टेंडर के शब्दों के अनुसार चलें।
स्रोत
- Public Procurement Policy for MSEs – FAQs, O/o DC (MSME) ↗
- General Financial Rules 2017 (as amended), Ministry of Finance ↗
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